श्री गणेश जी कहानी हिंदी में,Ganesh Chaturthi क्यों मनाई जाती है?

By | August 28, 2019

हमारे देश मे वैसे तो बहुत सारे त्यौहार मनाएं जाते है. लेकिन उन में से कुछ खाश त्यौहार भी होते है जिनको हम बहुत ही धूम धाम से मनाते है। जैसे कि होली, देशहरा, दीवाली, और इन्ही त्यौहारों के बीच मे आता है Ganesh Chaturthi. जिसको पूरे देश मे मनाया जाता है. लेकिन गणेश चतुर्थी को सबसे ज्यादा अगर कह़ी celebrate किया जाता है, तो वो है मुम्बई शहर में, यहाँ पर गणेश जी को काफी पूजा की जाती है, वैसे तो गणेश भगवान को हर जगह पूजा जाता है लेकिन मुम्बई ऐसी जगह है जहाँ गणेश चतुर्थी पूजा की धूम अलग ही होती है. यहाँ के जैसे गणेश चतुर्थी को पूरे भारत मे कही और celebrate नही किया जाता है।

जैसा कि आप सभी लोगो को ज्ञात ही होगा कि भगवान गणेश माता पार्वती और शिव जी के पुत्र है और उन्ही के जन्म दिवस पर इस त्यौहार को मनाया जाता है। भगवान गणेश जी की बहुत सी कथाएँ प्रचलित है और उनका उल्लेख भी पुराणों में किया गया है. जैसे कि एक बार दोनों भाइयों कार्तिकेय और गणेश में से पहले विवाह किसका हो, और इसके लिए शर्त लगी कि कौन सबसे श्रेष्ठ है. तब उसके लिए उनके माता पिता ने अपने दोनों पुत्रों को कहा कि जो पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा लगाकर आएगा वो ही सबसे श्रेष्ठ कहलाएगा, तब कार्तिकेय अपनी सवारी मोर पर बैठ कर पृथ्वी की परिक्रमा लगाने के लिए चले गए, लेकिन गणेश जी की सवारी तो मूषक यानी कि चूहा था, तो वो कैसे जाते, फिर उन्होंने सोचा कि सभी लोको से ऊपर तो माता पिता का दर्जा होता है और उनका वाश ही सभी लोको में होता है. तो उन्होंने अपने माता पिता को बैठाया और उनके चारो तरफ परिक्रमा लगाई और कहा कि माता पिता तो तीनो लोको से ऊपर होते है इस संसार मे, इस पर उनकी माता पार्वती ने कहा कि पुत्र गणेश तुम ने अपनी बुद्धि का बहुत अच्छे से उपयोग किया है और इसमें तुम ही विजई हुए हो तथा उनका सबसे श्रेठ का दर्जा प्राप्त हुआ।

हमारे देश मे भगवान गणेश का एक उच्च दर्जा है, हमारे यहाँ कोई भी काम को शुरु करे से पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है और फिर उसके बाद ही किसी कार्य की शुरुआत की जाती है। ऐसा इस लिए किया जाता है क्योंकि भगवान गणेश को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और ऐसा भी कहा जाता है कि अगर उनकी पूजा किसी कार्य को करने से पहले करे तो हमेशा उस काम मे सफलता मिलती है और बरकत भी होती है।

तो चलिए अब विस्तार से जान लेते है कि गणेश चतुर्थी क्या होता है और इसे कब मनाया जाता है। Ganesh Chaturthi के पीछे की क्या है कहानी, गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे रखे, गणेश चतुर्थी में कितने दिनों तक गणेश की पूजा होती है तथा गणेश जी का विसर्जन कैसे और कब किया जाता है।

गणेश चतुर्थी क्या है और यह कब मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी हिंदुओं का सबसे प्रिय त्यौहार है और यह भाद्रपद माह शुल्क पक्ष को चतुर्थी में मनाई जाती है जो कि अक्सर अगस्त या सिंतबर में ही होती है। जब गणेश चतुर्थी का त्यौहार आने वाला होता है, तब कुछ दिन पहले से ही उसकी तैयारी करनी शुरु कर दी जाती है. इसमें जो लोग मूर्तिकार होते है वो लोग महीनों पहले से गणेश जी की मूर्ति बनानी शुरु कर देते है, ताकि जब गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो तब सभी लोग गणेश जी की मूर्ति को ख़रीद सके और उसे अपने अपने घरों मे स्थापित कर सकें। जब गणेश चतुर्थी का त्यौहार कि शुरुआत होती है तब बाजारों में बहुत ख़रीददारी होती है और सभी जगह सजावट का सामान उपलब्ध होता है।

जब Ganesh Chaturthi का दिन आता है तो उस दिन जिन लोगो को अपने घर में गणेश जी की स्थापना करनी होती है वो लोग बाजार से जाकर सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति को ले आते है और अपने घर मे स्थापना करने के वक़्त पंडित को भी बुलाते है ताकि मूर्ति स्थापनको विधि पूर्ण किया जा सके।

फिर जब स्थापना का समय होता है तो पहले मंत्रो का उच्चारण किया जाता है और उसके साथ साथ गणेश जी की भी स्थापना की जाती है. और जब स्थापना हो जाती है तब, गणेश जी की आरती को गाया जाता है और उसके बाद सभी को प्रसाद दिया जाता है फिर इसी तरह अगले 10 दिनों तक रोज़ सुबह शाम गणेश जी की पूजा की जाती है। वैसे तो इस त्यौहार को पूरे भारत मे मनाया जाता है लेकिन गणेश चतुर्थी त्यौहार को महाराष्ट्र में बहुत ही धूम से मनाया जाता है। कई जगहों पर तो सार्वजनिक रूप से पूजा की जाती है और program के होते है और भजन कीर्तन भी खूब किया जाता है। और कई जगहों पर तो पूरे 10 दिनों तक रोज सुबह और शाम को भंडारा भी करवाया जाता है। लोग इन दिनों में दूर दूर से मूर्तियों को देखने और उनकी पूजा अर्चना करने आते है।

इस पर्व को सभी लोग इस लिए मनाते है ताकि उनके घर मे शांति, समृद्धि और कृपा बनी और दुष्ट सक्तियो का घर मे प्रवेश न हो।

गणेश जी का जन्म के पीछे की क्या कहानी है?

वैसे तो गणेश जी के जन्म के कई कहानियां आप ने सुनी होगी। लेकिन हम जो आपको बताएँगे यह बिल्कुल सही तथा वेदों और पुराणों के अनुसार है. तो अगर आप लोगो को अभी तक गणेश जी के जन्म की कहानी नही पता है तो कोई बात नही हम आपको इसके पीछे की रोचक कहानी बताते है। और उनका मुख ऐसा किस वजह से है वो भी आपको बताते है तो इस कहानी को आप अच्छे और ध्यान से पढ़िए गा।

एक बार माता पार्वती जब नहाने के लिए जा रही होती है तो वो बाहर रुकने के लिए किसी को ढूंढ रही होती है. लेकिन उस समय कोई भी महिला सेविका या अन्य कोई सेवक वहाँ पर मौजूद नही होता है, तो वो सोचती है कि ऐसे तो कोई भी व्यक्ति अंदर आजयेगे। तो वो नहाने से पहले अपने शरीर के मैल से एक मूर्ति का निर्माण करती है और उसमें अपने खून का कुछ अंश डाल कर अपनी शक्तिओ से उसे जिवीत करती है। इस तरह गणेश जी का जन्म होता है।

फिर वो गणेश जी को आदेश देती है कि तुम बाहर जाकर मुख्य दरवाज़े पर रहो और यदि कोई व्यक्ति अंदर आने की कोशिश करे तो उसे अंदर आने मत देना जब तक की मै स्नान कर के बाहर नही आती। तो गणेश जी अपनी माता की आज्ञा के अनुसार बाहर पहरा देने लगे। तभी कुछ भूत, वैताल भगवान शिव जी की आज्ञा से माता पार्वती को बुलाने के लिए आए लेकिन गणेश जी ने उनको अंदर जाने से रोक लिया तथा उनमें युद्ध भी हुआ और गणेश जी ने सभी भूतों और वैतालो को पराजित कर भगा दिया। फिर कुछ देर बाद अन्य और भी आए लेकिन उनको भी अंदर नही जाने दिया और सबको पीट कर वापिस भगा दिया।

अब सब लोग माहदेव जी के पास रोते रोते गए और उनको बोला कि वहाँ दरवाजे के पास एक बालक है जो किसी को अंदर नही जाने दे रहा है और जो भी अंदर जाने की कोशिश कर रहा है वो बालक उसको पीट रहा है। इसके बाद महादेव नंदी को माता पार्वती के पास भेजा और जब नंदी गणेश से मिले तो उनसे आग्रह की अंदर जाने देने की, लेकिन गणेश जी ने नही जाने दिया। फिर नंदी ने गणेश पर बल का प्रयोग किया लेकिन वहाँ भी नंदी को हार का ही सामना करना पड़ा, अंत मे हार कर नंदी महादेव के पास गए और बोला कि वो बालक बहुत शक्तिशाली है और सबको पीट रहा है जो भी अंदर जाने की कोशिश कर रहा है। इस पर महादेव को क्रोध आ गया और वो फिर खुद माता पार्वती से मिलने के लिए चल दिए। जब भगवान शिवजी वहाँ पहुँचे और अंदर जाने की कोशिश करने लगे तब गणेश ने उनको दरवाजे के बाहर ही रोक लिया। लेकिन महादेव ने साहस का परिचय देते हुए गणेश से प्रेम से बात की और समझाया कि वो उनके पति है उनके अंदर जाने से भला पार्वती जी को क्या आपत्ति होगी। लेकिन गणेश जी नही माने और उन्होंने महादेव जी से कहा कि मैं अपनी माता की आज्ञा का पालन कर रहा हु और उनकी आज्ञा के अनुसार जब तक वो न बोले अंदर आने को तब तक कोई भी व्यक्ति अंदर नही जा सकता है। लेकिन महादेव ने उसे बार बार समझाया, परन्तु जब गणेश जी नही माने तो क्रोध में आकर उनका सर महादेव जी ने अपने त्रिशूल से काट दिया।

जब माता पार्वती बाहर आई और गणेश जी का कटा हुआ सर देखा तो रो पड़ी और गुस्से में आकर रौद्र रूप धारण कर लिया। इससे घबराय लोगो ने इसके समाधान महादेव जी को करने के लिए कहा। तब महादेव जी ने कहा कि सर मैं इसका तभी जीवित कर सकता हु जब तुम किसी ऐसे जीव का सार काट कर लाओ जिसकी माँ अपने बच्चे की तरफ पीठ कर के सोई हो। तब सभी लोग ऐसे जीव की तलाश में निकल गए. लेकिन किसी तो कुछ नहीं मिला अंत मे एक मादा हाथी अपने बच्चों के तरफ पीठ कर के सोई हुई थी उसका सर काट कर ले और फिर महादेव जी ने गणेश के मुख की जगह हाथी का मुख लगा दिया और उसे जीवित कर दिया। इसी लिए गणेश जी को गजराज भी कहा जाता है।

Ganesh Chaturthi की पूजा को संपन्न रूप से मनाने की विधि?

गणेश की को घर में लाने से पहले  घर को अच्छे से  सजाएं  और मंदिर में स्थापना के स्थान पर  कुमकुम से  स्वास्तिक  बनाएं  और उनमें चार हल्दी की  बिंदिया भी लगाएं  तथा एक मुट्ठी  अक्षत रखें  इस पर एक छोटा चौकी  रखें  उस पर पीले वस्त्र को  बिछाए  और वहां के स्थान को दीपों से रोशन करें। अब मंदिर के चारों तरफ  फूल आम के पत्ते तथा अन्य सजावटी सामान  लगाए ताकि सभी चीजें  सुंदर और मन-मोहक लगे  और जब आप गणेश जी की अपने घर मे लाकर स्थापित करे तब उससे पहले सभी विधि को पूरी अच्छे से करे। जब गणेश जी की स्थापना हो जाए तो उनकी स्थापना के बाद एक अभिनंदन भजन जरूर करे और रोज़ शाम को अगले दस दिनों तक आरती करनी जरूरी है तथा उसमे घर के सभी लोगो का सम्मिलित होना भी जरूरी है। आरती के बाद सभी को मोदक या लड्डू का प्रसाद देना चाहिए।

जब आप गणेश जी की मूर्ति की स्थापना कर लेंगे तब आप  पूजा की सामग्री को भी उनके सामने रख दें, जिसमें की उनके बाएं हाथ की तरफ गंगा जल से भरा हुआ कलश को चावल के ऊपर स्थापित कर दें तथा वहां पर धूप या अगरबत्ती जरूर जलाएं। कलश के मुख पर मौली को बांधे और आम के पत्ते को कलश के मुख पर रख दे और उसके ऊपर नारियल को रख दे ध्यान रहे कि नारियल की जटाए ऊपर की तरफ हो। तथा गणेश जी के दाएं हाथ की तरफ दिए और शंख को रखना चाहिए।

गणेश चतुर्थी को क्यो मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी को भगवान श्री गणेश जी के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। और इस दिन श्री गणेश जी की मूर्ति की स्थापना लोग अपने-अपने घरों में करते हैं और इस दिन से बाकी के आने वाले 10 दिनों तक रोज उनकी पूजा करते हैं तथा सभी को आरती के बाद प्रसाद दिया जाता है। आरती के दौरान सभी लोग श्री गणेश जी से सुख, शांति, समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं.

हमारे देश में यह भी मान्यता है कि यदि किसी काम को करने से पहले गणेश जी की पूजा कर ली जाए, तो उस काम में कोई भी विघ्न नहीं आता है तथा कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है।  इसलिए किसी भी कार्य को करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है और इनको मंगल मूर्ति के नाम से भी जाना जाता है।

Ganesh Chaturthi सबसे ज्यादा कहाँ पर धूम धाम से मनाया जाता है?

वैसे  तो गणेश चतुर्थी के मौके पर पूरे भारत में धूमधाम से गणेश जी की स्थापना और पूजा की जाती है।  लेकिन महाराष्ट्र में इसे एक त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है और यहां पर जगह-जगह गणेश जी की मूर्तियां को स्थापित किया जाता है बड़े-बड़े पंडालों को लगाया जाता है और वहां पर कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

गणेश चतुर्थी  को सार्वजनिक रूप से मनाने के पीछे किसका हाथ था?

गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से मनाने के पीछे  लोक मान्य तिलक जी का हाथ था। उन्होंने इस निजी उत्सव को सार्वजनिक तौर पर मनाया था, इसके पीछे उनकी मंशा केवल यही थी कि सभी लोग इस उत्सव में शामिल हो और इसमें सभी लोग भाग ले, इसके पीछे वह बस इतना चाहते थे कि निम्न जाति के लोगों को भी पूजा अर्चना करने का मौका मिले और ब्राह्मणों तथा अन्य जाति के लोगों के बीच में अंतर कम हो और सब लोग मिल जुल कर एक साथ रहे तथा त्योहारों को हर्ष और उल्लास के साथ मनाएं।

Ganesh Chaturthi पर पूजा में किस प्रकार के फल और मिठाइयों का प्रयोग किया जाता है?

वैसे तो गणेश जी को सभी प्रकार की चीजें जैसे कि फल और अन्न, खाने में पसंद आती हैं. लेकिन उनका पसंदीदा आहार मोदक और लड्डू है. वह इन दो चीजों को से को बहुत ही चाव से खाते हैं।  ऐसा भी माना जाता है कि यदि आपको श्री गणेश जी को खुश करना हो तो आप केवल मोदक या लड्डू का भोग ही लगाएं।

गणपति विसर्जन कब और कैसे किया जाता है?

दस दिनों तक गणपति जी को विराजमान होने के बाद, जब आख़िरी दिन उनको विसर्जन के लिए तैयार किया जाता है तब बहुत सी विधियो को किया जाता है। सबसे पहले तो जब शुभ मुहर्त समय देखा जाता है और फिर पूजा अर्चना और आरती की जाती है। और उसी दौरान जो भी उनके मनपसंद चीज़े होती है जैसे कि फल, लड्डू और मोदक वो सभी चीजों का भोग लगाया जाता है और उसके बाद गणेश जी के पवित्र मंत्रो का जाप किया जाता है।

इसके बाद जब गणेश जी को उठाने से पहले आपको साफ पट्टा लेना है और उसमें गंगा जल और गौमूत्र से पवित्र करना है। इसके बाद उस पर अक्षत रखे और उसके बाद उस पर पीला, लाल, या गुलाबी कपड़ा रखे।

अब इसके ऊपर कुछ गुलाब की पंखुड़ियों को बिखेरे साथ में पाटे की चारों तरफ एक एक सुपारी रख दे। अब श्री गणेश जी की मूर्ति को जयकारे के साथ स्थापना वाली जगह से उठाएं और पाटे पर विसर्जित करने के लिए रखें। पाटे पर विसर्जित करने के साथ फूल, फल, वस्त्र और उनके चढ़ावे को जरूर रखें तथा उसके साथ आप 5 मोदक भी रखें।

अब एक छोटी पोटली में चावल, गेंहू और पाँच मेवे को रखे। अब जब आप विसर्जन के लिए घर से निकले तो उससे पहले पूरी तैयारी कर ले ताकि श्री गणेश जी के विसर्जन के दौरान किसी प्रकार की बाधा ना आए, क्योंकि मान्यताओं के अनुसार गणेश जी का पूरी धूमधाम और सत्कार के साथ ही विसर्जन किया जाना चाहिए। जब आप घर से बाहर विसर्जन के लिए निकले तब खूब धूम धाम के साथ और नाच गानों के साथ विसर्जन के लिए जाए।

अब जब आप किस नदी या समंदर के पास विसर्जन के लिए पहुँच जाए, तब आप विसर्जन से पहले कपूर से एक बार आरती जरूर करे और गणेश जी को कुशलता से विदा करें तथा उनसे धन, सुख, शांति समृद्धि का आशीर्वाद भी मांगे और इसकी भी याचना करें कि अगर आपसे उन 10 दिनों में कोई गलती या सेवा में कमी रह गई हो तो उन्हें उसके लिए क्षमा कर दें।

अब आप धीरे धीरे से गणेश जी की मूर्ति को पानी मे विलीन कर दे।

Conclusion

दोस्तों अपने ने इस पोस्ट के द्वारा जाना कि हमारे देश मे गणेश चतुर्थी क्यो मनाई जाती है और इसके पीछे की कहानी क्या है, गणेश चतुर्थी को कैसे मनाए की हमारी पूजा सफल हो और कैसे पूजा की जानी चाहिए, तथा भगवान गणेश जी का विसर्जन कब और कैसे किया जाता है।

हमारे देश मे लगभग हर महीने कोई न कोई त्यौहार होता है लेकिन कुछ ही त्यौहार है जिनको हम लोग बहुत धूम धाम से मनाते है. जब गणेश चतुर्थी आती है तो हमारे जीवन मे खुशियां भी लेकर आती है और हम लोग गणेश जी की पूजा करते है और उनको अपने घर मे लाकर रखते है। गणेश नई की पूजा हम लोग 10 दिनों तक करते है और इग्यारहवें दिन उनका विसर्जन हो जाता है। लेकिन इन 10 दिनों तक रोज़ शाम को गणेश जी की भजन और आरती की जाती है और लड्डू तथा मोदक का प्रसाद बांटा जाता है। और जब अंत मे गणेश जी के विसर्जन का समय आता है तो इसे बहुत धूम धाम से करते है.

 उस वक़्त तो मानो जैसे किसी बड़े त्यौहार का से हो ऐसा लगता है। सभी गलियों में इसी की धूम होती है और उनकी मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाते समय खूब लोगो की भीड़ होती है और ढोल नगाड़ो पर लोग नाचते है और जब अंत मे किसी नदी या समंदर के पास पहुचते है, तब सभी के आखों में आशु भी होता है और एक खुशी भी होती है कि फिर अगले साल गणपति जी आएंगे। फिर पूजा की जाती है तथा गणेश जी का विसर्जन कर दिया जाता है।

लेकिन यहाँ हम आपको ये जरूर बताना चाहते है कि जब भी आप गणपति जी को मूर्ति को खरीदे तब आप इस बात का जरूर खयाल रखें, कि वो मूर्ति किसी तरह के chemical के द्वारा न बनी हो, जिससे कि जब विसर्जन हो तब वह पानी को दूषित कर दे। आप हमेशा organic material से बने ही मूर्ति को खरीदे ताकि पर्यावरण को इससे कोई भी नुकसान न हो और जहाँ भी अपने गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया है वहाँ का जल भी दूषित न हो ताकि किसी भी जलीय जीव जंतु को इससे नुकसान न पहुँचे।

दोस्तों अगर आप ने इस पोस्ट के द्वारा गणेश चतुर्थी के बारे मे कुछ जाना हो और यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने परिवार के साथ तथा अपने close friends और social media friends के साथ share ज़रूर करे ताकि उनको भी इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो और वो लोग भी इस त्यौहार को अच्छे से और विधि पूर्वक मना पाए।

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