क्या है Article 35A? और इसे क्यूँ हटाया गया?

By | August 21, 2019

जैसा कि Article 35A अब नही रहा। लेकिन जब article 35a को हटाया गया था, तब पूरे भारत में मानो एक हड़कंप सा मच गया था। आर्टिकल 35a को हटाने की सूचना खुद गृह मंत्री अमित शाह जी ने दी थी। जब भारत के संविधान से धारा 370 और धारा 35a को हटाया गया था तब जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। यह केवल इसलिए कर दिया गया गया था की वहां पर किसी भी प्रकार से कोई अनहोनी ना हो और यदि कोई व्यक्ति किसी प्रकार से कानून की अवहेलना करता है, तो उसे दंडित किया जा सके।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति के द्वारा आर्टिकल 35a को लाने के पीछे केवल एक ही मकसद था कि जम्मू और कश्मीर को तरक्की की राह पर ले जाया जाए और वहां की सभी problems का उचित समाधान हो सके। लेकिन इस कानून को एक निश्चित काल के लिए ही संविधान में शामिल किया गया था, जिसे समय के अनुसार हटा देना चाहिए था। परंतु आने वाली सरकारों ने आर्टिकल 35a को हटाने का प्रयत्न तो किया लेकिन वह लोग इसमें सफल नहीं हो सके।

पिछली सरकारों ने चाहे जो भी प्रयास किए हो, लेकिन जब भारत मे BJP की सरकार दोबारा से 2019 में चुन कर आई, तो उन्होंने article 35A को हटाने का काम सफलता पूर्ण तरीके से किया। हालांकि 35A जैसे कानून को हटा पाना मुश्किल काम था। क्योंकि इसको हटाने में काफी बाध्यताएँ थी, लेकिन BJP और NDA की सरकार ने इसका तोड़ निकाला और जम्मू और कश्मीर से धारा 35A के साथ साथ धारा 370 को भी इतिहास बन दिया।

article 35A की वजह से ही जम्मू और कश्मीर की सरकार अपना संविधान बना पाई और वहाँ पर की सरकारों ने जम्मू और कश्मीर पर अपना राज चलाया और वो लोग मनमानी करते रहे। हालांकि इसके बहुत फायदे भी थे और article 35A वहाँ के नागरिकों को ही केवल नौकरी करने की आज़ादी देता था तथा अन्य राज्य के लोगो को वहाँ किसी प्रकार का कोई लाभ नही प्राप्त था। लेकिन article 370 और article 35A की वजह से भारत की Centre government खुद को बेबस समझती थी और Centre का वहाँ की सरकार और लोगो पर कोई भी नियंत्रण नही था। जिस वजह से जम्मू और कश्मीर का मौहाल भी काफी हद तक खराब होता चला गया। लेकिन article 35A को अब पूर्ण रूप से खत्म कर दिया गया है और जम्मू और कश्मीर को दो राज्यों के रूप में बांट दिया गया है, जो कि एक लद्दाख है और दूसरा जम्मू और कश्मीर है। तो चलिए अब article 35A के बारे में विस्तार से जान लेते है और इसे कब संविधान में शामिल किया गया था तथा इसके क्या फायदे और नुकसान थे। तथा ये भी जानेंगे कि कब और कैसे article 35A को खत्म कर दिया गया और ऐसा करना हमारे अखंड भारत के सपने को साकार करने के लिहाज से भी क्यों जरूरी था।

Article 35A क्या था?

Article 35a को उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लागू करने का सुझाव दिया था और इसे उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के द्वारा 14 मई 1954 को लागू किया गया और भारत के संविधान में शामिल किया गया। यह धारा कहती है कि जम्मू और कश्मीर के पास ये विशेष अधिकार है कि वो जम्मू कश्मीर राज्य के लिए अलग से संविधान बना सकते है और वह यह फैसला भी ले सकते है कि वहाँ की permanent नागरिकता किसे देनी है और किसे नही, और वहाँ के लोगो को किन चीज़ों के अधिकार देने है या नही देने है। यह पूर्ण रूप से वहाँ की सरकार decide कर सकती थी। तथा वहाँ के कानून के मुताबिक बाहरी लोगों को जो जम्मू और कश्मीर के नही है उनको ज़मीन, सरकारी नौकरियाँ और scholarship जैसी सुभिधाओँ से वंचित रखा जाता था। जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर में कोई भी व्यक्ति या business man अपना पैसा वहाँ invest नही करना चाहते थे।

Article 35a को वहाँ की राज्य सरकार को, जो सबसे ज्यादा power प्रदान करता था, वो था कि वहाँ की विधानसभा के द्वारा की गई किसी भी कार्य पर केंद्र सरकार या supreme court किसी प्रकार से कोई दखलंदाज़ी नहीं कर सकती थी। जिसका वहाँ सभी ने खूब फायदा उठाया गया।

Article 35A कैसे वहाँ के नागरिकों को विशेष अधिकार प्रदान करता था। इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ, जो आपको जानना जरूरी है?

Article 35A जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार को एक तरह से अपने खुद के कानून बनाने और उनका पालन करने की अनुमति देता था और जिसकी वजह से सभी प्रकार की परेशानियों का आरंभ होना शुरू हुआ। लेकिन इसे हटाया जा सकता था उसके लिए केवल राष्ट्रपति के द्वारा आदेश की जरूरत थी जो कि अभी पिछले दिनों notification जारी कर दिया गया था। हालांकि यदि इस कानून में किसी प्रकार की अगर modifications की जरूरत हो तो, वो राष्ट्रपति के द्वारा संभव था लेकिन फिर भी बहुत चुनौतियाँ थी। तो चलिए अब जान लेते है कि कैसे article 35A की वजह से वहाँ के नागरिकों को special दर्जा मिलता था।

  • जम्मू और कश्मीर के लोगों को दोहरी नागरिकता प्राप्त थी। जिसमें एक भारत की नागरिकता शामिल थी तथा दूसरी जम्मू और कश्मीर राज्य की नागरिकता थी। जिसकी वजह से वहाँ के लोग भारत और जम्मू कश्मीर के नागरिक तो कहलाते थे, लेकिन अन्य राज्य का कोई व्यक्ति जम्मू कश्मीर का नागरिक नहीं बन सकता था
  • Article 35a की वजह से ही वहां की राज्य सरकार को अपना खुद का संविधान अधिकार प्राप्त था और केंद्र सरकार इसमें अपना कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी।
  • जम्मू और कश्मीर में केवल वहां के निवासी ही किसी भी जगह, ज़मीन को ख़रीद एवं बेच सकते थे और किसी भी अन्य राज्य के किसी भी व्यक्ति के पास है वहां पर ज़मीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं था
  • जम्मू और कश्मीर में article 35A की वजह से केवल वहाँ के नागरिकों को ही vote देने का अधिकार प्राप्त था और किसी अन्य राज्य का व्यक्ति वहाँ की पर election के लिए खड़े नही हो सकते थे।
  • जम्मू कश्मीर की महिलाएं भारत किसी अन्य राज्य के पुरुष के साथ विवाह नही कर सकती थी और यदि वो ऐसा कर लेती तो उनकी कश्मीरी होने की नागरिकता छिन जाती थी और उनके बच्चे पूरी तरह से वहाँ की नागरिकता खो देते थे। लेकिन वही अगर वहाँ की कोई महिला किसी पाकिस्तानी के साथ शादी कर ले तो उसकी नागरिकता बानी रहेंगी।  और उल्टा पाकिस्तान के नागरिक को भारत और जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी।
  • यदि जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार वहाँ के किसी भी कानून में कोई परिवर्तन करती है चाहे वो वहाँ के नागरिकों को सही लगे या न लगे उसे सभी को मानना ही पड़ता था। क्योंकि वहाँ के नागरिक किसी भी सरकार या कानून के खिलाफ supreme court में कोई भी चुनौती नही दे सकता था।
  • Article 35A की वजह से जम्मू कश्मीर राज्य में financial या अन्य प्रकार की आपात-काल नही लगाई जा सकती थी। और यदि केंन्द्र को लगाना होता तो उसके लिए पहले राज्य सरकार से फिर राष्ट्रपति से permission लेना पड़ता।
  • Article 35a के कारण यहाँ पर धारा 356 लागू नही की जा सकती थी।
  • भारत के उच्च न्यायालय का कोई भी आदेश यहाँ पर मान्य नही था और न ही कोई व्यक्ति और राज्य सरकार उसको मानने के लिए बाध्य थी।
  • इस bill को लागू करने का केवल ये मकसद था कि जम्मू और कश्मीर अन्य राज्यों की तरह तरक्की की राह पर चल सके और वहाँ के नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता मिले, लेकिन वहाँ के राज्य सरकार ने अपना खुद का flag बना लिया और वहाँ पर उसी को फहराया जाने लगा।
  • अगर जम्मू और कश्मीर का कोई नागरिक पहले भारत के राष्ट्रीय तिरंगे का अपमान करता था तो वो अपराध की श्रेणी में नही आता था।
  • Article 35a के तहत केवल वहाँ के नागरिकों को ही नौकरियाँ मिल सकती थी और किसी अन्य व्यक्ति को वहाँ नौकरी करना का अधिकार नही था। जिससे कि वहाँ पर बेरोज़गारी की दर दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गयी।

जम्मू और कश्मीर का Article 35A कानून, इतना विवादो में क्यों बना रहा?

Article 35a को संविधान में include करने की वजह से बहुत से लोगो ने इसके खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया था लेकिन इस धारा को केवल इस लिए लाया गया ताकि जम्मू और कश्मीर के लोगो का विश्वास हासिल किया जा सके और उनको ऐसा न लगे कि उन पर ज़बरदस्ती किसी प्रकार से शासन किया जा रहा है और वहाँ पर किसी प्रकार का कोई विरोध प्रर्दशन न हो।

इस लिए धारा 35a को संविधान मे शामिल किया गया था। और तभी से यह article विवादों में घिरा रहा। तो चलिए जान लेते है इस article 35a ने किन विवादों को जन्म दिया।

  • Article 35a जम्मू और कश्मीर के नागरिकों को कुछ ऐसे अधिकार देता था जो कि भारत के किसी अन्य राज्य को, इस तरह का विशेष दर्जा प्राप्त नही था। जिसकी वजह से कुछ लोग नही चाहते थे कि ऐसा कोई कानून हो, जो देश की अखंडता के लिए खतरनाक साबित हो। इस कानून की वजह से देश टुकड़ो में बट जाएगा।
  • इस धारा की वजह से जम्मू और कश्मीर में अन्य किसी state का व्यक्ति वहाँ पर कोई सरकारी job प्राप्त नही कर सकता था। जो कि एक तरह से एक ही देश के नागरिकों के साथ भेदभाव करना ही कहा जा सकता था।
  • Article 35a राज्य के अन्य नागरिकों के साथ अलग तरह का व्यवहार करता था जिसकी वजह से अन्य नागरिक यहाँ पर रह नही सकते थे और न कि जम्मू और कश्मीर के नागरिक कहला सकते थे। यह धारा पूर्ण रूप से भेदभाव को जन्म देता था।
  • इस article की वजह से अन्य राज्य का कोई व्यक्ति यहाँ पर होने वाले किसी भी election में हिस्सा नही ले सकता था। जिसकी वजह से जम्मू और कश्मीर में केवल दो ही राजनीतिक पार्टियाँ थी और वहाँ के लोगो को हर election में केवल उन दोनों में से ही किसी party को चुनना होता था।
  • यह article संविधान के कई नियमों को तोड़ता था जैसे कि समानता का अधिकार, justice का अधिकार, और भी कई तरह के बुनियादी नियमों को भी यह article 35a तोड़ता था।
  • जम्मू कश्मीर में जितने भी लोग 1947 के बाद वहाँ पर रह रहे थे, वो अब तक केवल एक रिफ्यूजी के तौर पर ही रहते थे। उनके पास किसी प्रकार की कोई नागरिकता नही थी।

भारत के संविधान में आर्टिकल 35A कैसे शामिल हुआ?

Article 35A को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के निर्देशानुसार लागू किया गया था। इसे लागू करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरु तथा जम्मू और कश्मीर के वजीर शेख अब्दुल्ला के बीच दिल्ली समझौता हुआ था। जिसमे जम्मू और कश्मीर के लोगो को भारत का नागरिक के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि इस कानून को पारित करने के वक़्त भी से लोगो ने आपत्ति भी जताई थी और कहाँ था कि यह भारत को अखंड और एक देश बनने के बिल्कुल उलट है और इससे अन्य राज्य भी इस तरह की विशेष अधिकारों की मांग करने लगेंगे। और यहाँ तक कि भीमराव अंबेडकर जी ने इस कानून से related draft बनाने से भी मना कर दिया था। परन्तु जवाहरलाल नेहरू ने किसी की एक न सुनी और भारत के कानून में राष्ट्रपति के आदेश के द्वारा article 35A को शामिल कर लिया गया।

Article 35A को कब और कैसे हमरे संविधान से हटाया गया?

Article 35a को भारत की सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संसद में पारित किया गया और 6 अगस्त 2019 को इस कानून को पूरी तरह से हटा दिया गया और इस से related सभी notifications को पूरे देश मे लागू कर दिया गया।

Article 35a और article 370 को संविधान से हटाना बहुत मुश्किल और जरूरी काम था। इसके पीछे बहुत से लोगो ने तथा मौजूदा मोदी सरकार ने काफी पहले से planning करनी शुरू कर दी थी। इसके लिए सरकार ने जम्मू कश्मीर में कुछ बहुत कड़े कदम उठाए। वहाँ पर सरकार को जिन लोगो और नेताओं पर सक था कि article 35A को हटाने को लेकर कुछ भड़काऊ भाषण दे सकते है या वहाँ ले लोगो को दंगो के लिए उकसा सकते है, उन सभी लोगो को सरकार ने house arrest में रख लिया और जब article 370 तथा article 35A को भारत के संविधान से हटाया गया, तो इससे पहले ही  जम्मू और कश्मीर में सेना को deploy कर दिया गया था ताकि किसी भी तरह से अगर कोई दंगे होते है तो उन पर control पाया जा सके। और फिर मौजूदा मोदी सरकार के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने article 35A को हटाने के लिए bill को 5 अगस्त 2019 को संसद में रखा गया जिस का सभी लोगो ने तथा विपक्ष के नेताओं ने भी समर्थन किया और article 35A को हटाने वाले bill को majority वोटों के साथ पारित कर दिया गया। इस पर ग्रह मंत्री का कहना था कि यदि इस धारा 35A की वजह से, यदि कश्मीरियों का भला होना होता तो अब तक कश्मीर इतना पीछे नही रह जाता। वह भी बाकी के राज्यों के साथ की तरह तरक्की कर रहा होता और वहाँ के गरीब लोग भूखे नही मर रहे होते।

अब  जम्मू और कश्मीर से धारा 35A और धारा 370 को पूर्ण रूप से हटा दिया गया है और कश्मीर को दो भागों में बांट दिया गया है। जो कि एक जम्मू और कश्मीर है तथा दूसरा लद्दाख है।

सरकार का कहना है कि अब जम्मू और कश्मीर के लोगो को रोज़गार मिलेगा और वहाँ पर industrialization होगा ताकि जिन लोगो के पास वहाँ सरकारी नौकरियाँ नही है वो लोग भी अपनी जीविका को चलाने के लिए private jobs को कर पाए। इससे सबसे बड़ा ये फायदा होगा कि वहाँ पर बेरोज़गारी की समस्या काम होगी और वहाँ के लोग भी गलत रास्तों को छोड़ कर सही तरीकों से पैसे कमाएंगे और अपनी जीवनशैली को चला पाएंगे।

कौन से लोग जम्मू कश्मीर के नागरिक कहलाते हैं और article 35A के फायदे और नुकसान क्या थे?

पहले जम्मू और कश्मीर का वही नागरिक कहला सकता था जो लोग वहाँ पर सन 14 मई 1956 से स्थाई रूप से रह रहे हो तथा इसके 10 साल पहले का कोई व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर में अपनी संपत्ति और जायदाद लेकर रह रहा हो।

Article 35A की वजह से वहाँ के नागरिकों के फायदे क्या थे?

  • वहाँ की राज्य सरकार के पास अपना एक अलग से flag था।
  • वहाँ के नागरिकों को केवल अधिकार था कि वो लोग जम्मू और कश्मीर में land से related चीज़ों की आपस मे सौदे-बाज़ी कर सकते थे।
  • वहाँ की population में article 35a की वजह से इज़ाफा नही हुआ जिसकी वजह से वहाँ अधिक संसाधनों की जरूरत नही पड़ती थी।
  • वहाँ पर industrializing न होने की वजह से वहाँ pollution की मात्रा की भी बहुत कमी है और वहाँ की खूबसूरती आज भी बरकरार है।
  • केवल वही के नागरिकों को जम्मू और कश्मीर में नौकरी करने का अधिकार था।
  • पहले वहाँ के नागरिक यदि सेना या फिर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करते थे तो उन पर किसी भी तरह का कोई भी देशद्रोह का मामला नहीं बनता था।
  • वहाँ के नागरिकों और सरकार पर CBI, income tax department जैसे बड़े organization किसी भी प्रकार से कोई भी action नही ले सकते थे।

चलिए अब Article 35A न होने की वजह से जो राज्य सरकार को नुकसान होगा के बारे में जान लेते है।

  • अब जम्मू और कश्मीर भी पूर्ण रूप से भारत के संविधान के हिसाब से चलेगा और सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेगा तथा जो पहले विशेष अधिकार मिलते थे अब वो नही मिलेंगे।
  • अब किसी भी नागरिक के पास दोहरी नागरिकता नही रहेगी सब को केवल भारतीय नागरिकता मिलेगी।
  • अब वहां पर अन्य राज्य के व्यक्ति ज़मीन ख़रीद सकते है जिसकी वजह से वहाँ पर population बढ़ सकती है और लोगो की ज़रूरतों भी बढ़ेगी।
  • यदि अब कोई वहाँ का नागरिक राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है तो वह देशद्रोह की श्रेणी में आएगा। उसे किसी प्रकार से कोई protection नही मिलेगी।
  • अब हो सकता है कि वहाँ industries लगे, जिसकी वजह से वहाँ की हवाओं में pollution की मात्रा बढ़ेगी और climate change जैसी चीज़ों के सामना हमे future में करना पड़े।
  • पहले धारा 35a की वजह से यहाँ पर supreme court के फैसले मान्य नही होते थे लेकिन अब सभी को supreme court के फैशलो को मनाना होगा।

Conclusion

दोस्तों आप ने हमारे इस post के द्वारा जाना कि article 35a क्या है और इसके क्यों भारत के संविधान से हटाया जाना जरूरी था। और इस कि वजह से क्यों केंद्र सरकार को सभी प्रकार किसी भी तरह के कानून को लागू करने में परेशानी होती थी। और article 35a के वजह से जम्मू और कश्मीर के लोगो को क्या फायदा और नुकसान होता था।

Article 35a की वजह से जम्मू और कश्मीर के राज्य सरकार को अपना खुद का अलग से संविधान बनाने का अधिकार प्राप्त था तथा वो किसी भी कानून को पारित करने के लिए किसी भी तरह से भारत के सांसद में पेशकश करने की कोई अवर्शकता नही थी। जिसकी वजह केंद्र सरकार का जम्मू और कश्मीर पर किसी भी प्रकार से कोई control नही था। जिसकी वजह से वहाँ के राज नेता किसी को जबाब देने के लिए बाध्य नहीं थे। और जम्मू और कश्मीर का कोई नागरिक या अन्य राज्य का कोई नागरिक वहाँ के किसी भी कानून के खिलाफ़ supreme court में चुनौती नही दे सकता था। जिसकी वजह से जम्मू और कश्मीर में कानून व्यवस्था को स्थापित रखने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब article 35a को पूर्ण रूप से संविधान में से हटा दिया गया और उसकी जगह नया bill पास कर दिया गया है तो वहाँ के नागरिकों और जम्मू कश्मीर के पास कोई भी विशेष राज्य का दर्जा नही रहा और पूरे देश मे अब केवल भारत का संविधान ही लागू होगा और सभी को संविधान के अनुसार बराबर का अधिकार मिलेगा।

दोस्तों अगर आपको हमारी यह जानकारी लाभदायक लगी हो और आपको इस post के द्वारा कुछ जानकारी प्राप्त हुई हो तो आप इस पोस्ट को अपने family और social media friends के साथ शेयर करे ताकि यदि उनको article 35a के बारे में जानकारी नही है तो उनको भी इसकी पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।

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